सेक्स पर बातचीत या तो न नफरत करने वाली बात है या एक ऐसा विषय जो आपको गुमराह कर रहा है। संस्कारी दिमाग अक्सर ही नैतिकता के नाम पर सेक्स रोगों वाले टॉपिक पर बातचीत करने से रोकता है। इसलिए हम अक्सर इन पर बातचीत करने की बजाय पर्दा डाल देते हैं ताकि हमारे जाली संस्कार सुरक्षित रहें। लेकिन क्या बातों को नकारने से आपकी समस्या ठीक हो जाएगी।


जैसा कि नया साल जल्दी ही आने वाला है तो चलिए खुद से एक वादा करते हैं कि आने वाले साल में हम खुद बदलाव का हिस्सेदार बनेंगे ताकि हम दूसरों को सेक्सुअल हेल्थ पर बातचीत करने के लिए मना सकें।


'अभी करो' पर मैं विश्वास करता हूं इसलिए आज मैं आज आपको इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी ईडी का इलाज करने वाली पांच चीजों के बारे में बताउंगा। डेटा कहता है कि 40 से 70 साल की उम्र के बीच करीब 30 फीसदी पुरुषों को ईडी हो जाता है। ईडी मतलब ये कि उन्हें अपने लिंग में इरेक्शन नहीं होता और अगर होता है तो वह ज्यादा देर तक बरकरार नहीं रहता। ईडी होने की कई वजहें हैं. जिनमें वस्कुलर, मांसपेशियों, न्यूरोनल, हार्मोनल, मनोवैज्ञानिक और दवाओं से लेकर शारीरिक प्रोब्लम तक कई समस्याएं इसकी जिम्मेदार हो सकती हैं। इसके अलावा उम्र का बढ़ना भी इसका एक कारण हो सकता है।


फिजिशियन्स के मुताबिक, कोरोनरी हार्ट डिसीज़ और टाइप-2 डाइबटीज ईडी होने के सबसे कॉमन कारण हैं। अगर आप लक्षणों को नकारते हैं और इलाज नहीं करवाते तो आपको हेल्थ की गंभीर प्रोब्लम हो सकती है। जैसे आपको दिल का दौरा भी पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल बरकरार रखना भी जरूरी है। पौष्टिक खाना खाएं, एक्सरसाइज करें और स्मोकिंग तो बिल्कुल ना करें। ऐसा करने से दिल का दौरा पड़ने की आशंकाएं कम होती हैं और सेक्सुअल परफॉर्मेंस बढ़ती है।


अच्छी बात ये है कि आयुर्वेद जो सालों पुरानी भारतीय इलाज की प्रणाली, उसके इलाज को भी ईडी के लिए काफी बढ़िया माना गया है। उसकी वजह ये है।


1. इसके इलाज में जड़ी-बूटियो, डाइट चार्ट और एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद से ईडी का इलाज संभव है, अब ये तो जगजाहिर है। सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेद सिर्फ फिजिकल लक्षणों पर ध्यान नहीं देता बल्कि पूरी बॉडी और माइंड की हेल्थ का खयाल रखता है।


2. जादुई जड़ी-बूटी: इस आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी को अक्सर सेक्सुअल डिसीज के लिए चमत्कारी दवा कहा जाता है। शतावरी रेसमोसस को सेक्सुअल अनुभव को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। यह बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा देती है और स्ट्रेस को कम करती है। इस तरह से यह ईडी का इलाज करने में मदद करती है। अश्वगंधा या इंडियन जिनसेंग, सफेद मुसली और दालचीनी कैसिया हार्मोन को स्थिर करते हुए स्पर्म काउंट को बढ़ाते हैं। ये दिमाग को साफ करते हैं और धीरे-धीरे स्ट्रेस को कम करते हैं। साथ ही ईडी का इलाज करने में मदद करते हैं।


3. अयुर्वेद में योग शामिल है: जड़ी-बूटियां काम और बढ़िया करें, इसलिए हर रोज योगा करना जरूरी है। योग ईडी का इलाज करने में मदद करता है, इस बात को बहुतों ने माना है। योग में मांसपेशियों को मोड़ने और ध्यान करने से ब्लड सर्कुलेशन और टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है। साथ ही स्ट्रेस कम होता है। इस तरह से यह ईडी के लक्षणों को कम करता है।


4. माना जाता है कि आयुर्वेद से वास्तव में बीमारी ठीक होती है और इसके साइड इफेक्ट कुछ नहीं हैं। सिंथेटिक दवाइयों के उलट, अयुर्वेद सेफ है और आपको इसकी जड़ी-बूटियों के साथ एक्सपेरीमेंट करने का मौका देता है। और परिणामों के बारे में चिंतित हुए बिना उपचार और खुराक को लें।


हालांकि, विशेष रोगों के इलाज में आयुर्वेदिक चिकित्सा कितनी बढ़िया है इसको लेकर अभी सिर्फ अनुमान ही लगाया जा रहा है। और दुनिया भर के शोधकर्ता अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। जब तक मेडिकल साइंस इस नतीजे तक नहीं पहुंचती तब तक ईडी के इलाज के लिए पूरी तरह से आयुर्वेद पर डिपेंड रहने से आपका केस बिगड़ सकता है। इसलिए बढ़िया बात ये है कि आप अपने डॉक्टर की सलाह लें जो खुद आपको कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां सुझा सकते हैं।