क्या मछली का तेल (फिश ऑयल) इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को दूर करने में मददगार है?

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) का मतलब है सेक्स के दौरान लिंग का पर्याप्त समय तक न खड़ा हो पाना। ये समस्या पुरुषों को किसी भी उम्र में हो सकती है। आमतौर पर लिंग की रक्त वाहिकाओं में पर्याप्त खून न पहुंच पाने को ही इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का कारण माना जाता है। कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं और गलत लाइफस्टाइल भी इसका कारण बनती है।

लिंग की धमनियों में प्लाक के जमने के कारण खून के आवागमन में बाधा पहुंचती है। कई शोध बताते हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की मदद से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ये एसिड फिश ऑयल यानी मछली के तेल में अच्छी मात्रा में पाया जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स में दो तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स का स्रोत है- ईकोसापेंटेनॉइक एसिड (Eicosapentaenoic Acid) और डोकोसाहेक्सीनॉइक एसिड (Docosahexaenoic Acid)। 


ओमेगा-3 फैटी एसिड के फायदे


ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के सेवन से ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस कम होता है। ये एसिड धमनी में जमा प्लाक को नष्ट करता है और रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है, साथ ही ये कार्डियोवस्कुलर बीमारियों, डायबिटीज और कई इंफ्लेमेट्री विकारों से भी बचाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स मस्तिष्क में डोपामाइन हार्मोन को भी बढ़ावा देते हैं। ये हार्मोन कामुकता बढ़ाने में मददगार होता है। ध्यान रखें, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक ऐसी समस्या है, जिसका इलाज आसानी से हो सकता है।


ओमेगा-3 फैटी एसिड के स्रोत


अगर आपको इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है, तो किसी दवा का सेवन करने के बजाय, फिश ऑयल सप्लीमेंट का सेवन करना आपके लिए ज्यादा सुरक्षित होगा। ये सप्लीमेंट आसानी से उपलब्ध होते हैं। ईडी की पॉपुलर दवाएं जैसे- वियाग्रा, लैविट्रा आदि के अपने साइड इफेक्ट्स हैं, इसलिए रोग की गंभीरता के आधार पर ही इनका सेवन करना चाहिए। अपने खानपान में ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले आहारों को शामिल करके भी ईडी में बहुत फायदा मिल सकता है। सैल्मन मछली, मैकेरल, सरडाइन्स आदि ओमेगा-3 के बेहतरीन स्रोत हैं। शाकाहारी स्रोतों में अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट, कद्दू के बीज, स्प्राउट्स और पालक आदि प्रमुख हैं।


ओमेगा-3 फैटी एसिड के नुकसान


ओमेगा-3 का ज्यादा सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। इसके कारण आपके शरीर की घाव भरने की क्षमता कम हो सकती है, क्योंकि ये प्लेटलेट फंक्शन को बाधित करता है। किसी सर्जरी या एक्सीडेंट के मामले में ये स्थिति गंभीर हो सकती है। इसके अलावा इसके ज्यादा सेवन से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और ब्लड प्रेशर घटने की समस्या हो सकती है। डायरिया, इन्सोम्निया, एसिड रिफलक्स, विटामिन ए कम होने का खतरा, जीभ का स्वाद चले जाना आदि कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। कई बार समुद्र में पाए जाने वाले कई हानिकारक तत्व भी इन मछलियों के साथ आपके शरीर में पहुंच जाते हैं, जो कि नुकसानदायक हो सकते हैं।

ध्यान दें कि किसी भी दवा या सप्लीमेंट के सेवन से पहले एक बार डॉक्टर से मिलकर इस बारे में जानकारी जरूर ले लें। सप्लीमेंट्स से ज्यादा बेहतर है कि आप अपने खाने की प्लेट में ऐसी चीजों को शामिल करें, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता हो। इसके अलावा इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या के लिए भी एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।


No content on this site should ever be used as a substitute for direct medical advice from your doctor or other qualified clinician. The sole purpose of these articles is to provide information about health and wellness. This information is not intended for use in the diagnosis, treatment, cure, or prevention of any disease.
Recent posts
Related posts