अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आप या आपका कोई करीबी इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन की परेशानी से जूझ रहा है, या फिर आप अपनी सेहत और अपनी सेक्स लाइफ़ को लेकर जागरुक रहते हैं। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि आप इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन के नाम पर डराने वाले विज्ञापनों के झूठ के जाल से बाहर निकल पाएंगे। आप यह भी जानेंगे कि लो ब्लड प्रेशर वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन की परेशानी का ख़तरा दूसरों से ज़्यादा होता है।


क्या होता है इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन? लो ब्लड प्रेशर वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन होना एक आम परेशानी क्यों है, इसे समझने के लिए पहले इरेक्टाइल डिसफंक्शन को समझना होगा। इरेक्टाइल डिसफंक्शन ऐसी परेशानी है जिसमें लिंग (पीनिस) सेक्स करने के लिए पूरी तरह से इरेक्ट यानी उत्तेजित नहीं होता और अगर इरेक्ट हो भी जाए तो इरेक्शन या उत्तेजना को ज़्यादा देर तक बनाए नहीं रख पाता।


असल में, पीनिस पुरुषों के शरीर का एक ऐसा भाग है जो सिर्फ़ मांसपेशियों से बना है। सेक्स के दौरान दिमाग केमिकल छोड़ता है जिससे पीनिस में खून का बहाव बढ़ जाता है। पीनिस की मांसपेशियां इस खून को अंदर रोक लेती है जिससे वह इरेक्ट हो जाता है और सख़्त हो जाता है। सेक्स के बाद मांसपेशियां खून को बहाव पर पकड़ ढीली कर देती है जिससे खून पीनिस की मांसपेशियों से बाहर आ जाता है और इरेक्शन ख़त्म हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के किसी भी हिस्से में अगर कोई परेशानी आ जाए, तो इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन हो सकता है।


लो ब्लड प्रेशर और इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन बीच क्या रिश्ता है? लंबे समय तक लो ब्लड प्रेशर की समस्या बने रहने से ब्लड वेसल यानी खून को शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक ले जाने वाली नसों की परत (लाइनिंग) को नुकसान पहुंचता है। इससे ब्लड वेसल सख़्त हो जाती हैं और सिकुड़ जाती हैं जिससे खून का बहाव कम हो जाता है। इसका असर पूरे शरीर पर असर पड़ता है। चूंकि पीनिस शरीर का ही हिस्सा होता है, इसलिए उस तक पहुंचने वाले खून में भी कमी आती है। ऐसा होने पर इरेक्शन में कमी आने लगती है या इरेक्शन को सेक्स के दौरान बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।


जैसे-जैसे लो ब्लड प्रेशर की समस्या गहराती है, इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन की समस्या भी बढ़ती चली जाती है। बार-बार इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन होने से पुरुषों में झुंझलाहट बढ़ने लगती है। यही झुंझलाहट आगे चलकर सेक्स में दिलचस्पी कम कर देती है। यह स्ट्रेस (तनाव), डिप्रेशन (अवसाद) या एंग्जायटी (घबराहट) और दूसरी मानसिक बीमारियों को भी न्योता देती है। इस परेशानी को छिपाना या नज़रअंदाज़ करना सही नहीं होता है। इस समस्या के बारे में हर किसी से राय लेना भी सही नहीं है। सबसे अच्छा यही होगा कि इस परेशानी से निपटने के लिए डॉक्टर से सलाह ली जाए और इलाज करवाया जाए ताकि एक अच्छी सेक्स लाइफ़ के साथ ही अपने साथी के साथ अपने रिश्ते की मिठास को बरकरार रख सकें।