डेली लाइफ में शिलाजीत का क्या उपयोग है?


शिलाजीत प्राकृतिक रूप से पहाड़ों पर मिलने वाला पदार्थ है, जिसका कि आयुर्वेद में प्रचुरता से उल्लेख मिलता है, इसका उपयोग अनेक रोगों की चिकित्सा में वर्णित है। शिलाजीत मे रसायन गुण की अधिकता होने की वजह से इसका उपयोग एक सुरक्षित और प्रभावी रेगुलर डाइटरी सप्लीमेंट के तौर पर किया जाता है। इससे ओवरऑल हैल्थ पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

आइये  जानते हैं कि डेली लाइफ में शिलाजीत उपयोग करने के क्या फायदे होते हैं।


शिलाजीत के लाभ

आजकल की जीवनशैली में लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर, सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारी बनती जा रही हैं। यह रोग हमारी खान पान की गलत आदतों, भरपूर नींद की कमी, अधिक स्ट्रैस के कारण होती हैं। आयुर्वेद में इस तरह के रोगों को निज रोग कहा गया है, और इनमें गलत दिनचर्या के कारण शरीर के दोष धातु दूषित हो कर रोगोत्पत्ति करते हैं। इन रोगों की चिकित्सा और रोकथाम में शिलाजीत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

इस संदर्भ में आयुर्वेद का कहना है कि 'संसार मे धातु विकृति के कारण होने वाला ऐसा कोई रोग नहीं है जो शिलाजीत के विधि पूर्वक सेवन से नष्ट न हो सके'।


एजिंग

शिलाजीत में पाया जाने वाला फ्लूविक एसिड प्रभावशाली एन्टी ऑक्सीडेंट एवं एन्टी इन्फ्लामेट्री क्वालिटी रखता है। इसके उपयोग करने से फ्री रेडिकल्स से बचाव होता है, साथ ही बढ़ती उम्र के साथ बॉडी में आने वाले परिवर्तनों की गति भी धीमी होती है, और लम्बे समय तक स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।



रक्ताल्पता

मनुष्य के शरीर के रक्त में आयरन की कमी के कारण होने वाले एनीमिया को दूर करने में शिलाजीत लाभदायक सिद्ध होता है। एनीमिया को दूर करने के लिए शिलाजीत के इफ़ेक्ट को पता करने के लिए एक स्टडी की गयी। इसमे वैज्ञानिकों ने 18 चूहों में एनीमिया उत्पन्न किया, और उन्हें 6,6 के तीन ग्रुप्स में बांट दिया गया। तीसरे ग्रुप के चूहों पर 11 दिन के बाद 500 मिलिग्राम शिलाजीत का प्रयोग किया गया। 21 दिन बाद तीनों ग्रुप्स की जांच की गई।  जिसमें सामने आया कि तीसरे ग्रुप के चूहों में बाकी के दोनों ग्रुप की अपेक्षा हेमोग्लोबिन, हिमेटोक्रिट और रेड ब्लड सेल्स का स्तर अधिक पाया गया।



वेस्कुलर सिस्टम 

शिलाजीत के सेवन से ब्लड वेसल्स हैल्थी रहती हैं, लम्बे समय से ब्लड प्रेशर के रोगियों में आर्टीस कमजोर होने लगती हैं, एवं इनके फटने की संभावना बढ़ जाती है| ऐसे में शिलाजीत के सेवन से फैली हुई आर्टीस अपने सही आकार में आ जाती हैं।



हार्ट हैल्थ

डाइटरी सप्लीमेंट के रूप में शिलाजीत का उपयोग करने से हार्ट हैल्थ और अच्छी होती है। क्रोनिक हार्ट डिजीज में हार्ट का आकार फैल जाता है जो कि शिलाजीत के प्रयोग से नॉर्मल हो जाता है। हार्ट हैल्थ पर शिलाजीत के प्रभाव को लेकर एक स्टडी की गयी। इसमे रेट्स को दो ग्रुप्स में बांट कर एक ग्रुप पर शिलाजीत का प्रयोग किया गया। बाद में दोनों ग्रुप्स पर हार्ट इंजुरी करने के लिए आइसो प्रोटेरेनॉल के इंजेक्शन दिए गये। स्टडी से पता चला कि जिस ग्रुप ने शिलाजीत प्रयोग किया था उसमें दूसरे ग्रुप की अपेक्षा काफी कम हार्ट इंजुरी हुयी। इससे स्पष्ट होता है की शिलाजीत हृदय की हानिकारक पदार्थों से सुरक्षा करता है |

यदि आप को पहले से कोई हार्ट डिजीज है तो शिलाजीत का प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना अच्छा रहेगा।


डाइबिटीज और रीनल हैल्थ

मनुष्य की इम्युनिटी और ओवर ऑल बॉडी को कमज़ोर करने वाली बीमारियों में डायबिटीज सबसे मुख्य है। इसके कॉम्प्लिकेशन के तौर पर बॉडी में धीरे धीरे न्यूरोपैथी, एंजियो पैथी, रेटिनोपैथी, नेफ्रोपैथी डेवलप होती है। जो क्रमशः नर्वस सिस्टम, ब्लड वेस्ल्स, आँखें , और किडनी को कमजोर कर देती हैं, शिलाजीत के सेवन से धीरे धीरे दूर होने लगती हैं |

आयुर्वेद ने शिलाजीत को मधुमेह का नैमित्तिक रसायन बताया है, इसका मतलब है की डाइबिटीस के रोगी के लिए शिलाजीत का सेवन बहुत ज्यादा लाभदायक होता है | साथ ही इसके प्रयोग से रीनल डैमेज भी बहुत तेजी से सुधर जाता है, रोगी के मूत्र में आने वाले सुगर और अल्बुमिन में कमी हो जाती है। इसका रेगुलर सेवन करने से डायबिटीज से बचाव होकर रोगी की इम्युनिटी बूस्ट हो जाती है। 



थकावट

थकावट यानी कि क्रोनिक फटीग सिंड्रोम(सी. एफ. एस.) एक विशेष तरह की अवस्था है जिसमे कोशिका में ऊर्जा उत्पादन करने वाला माइटोकॉन्ड्रिया की क्रियाशीलता कम हो जाती है। परिणामस्वरूप सम्बंधित व्यक्ति में ऊर्जा की कमी महसूस होने लगती है, किसी काम में मन नहीं लगता। शिलाजीत के सेवन से शरीर में प्राकृतिक रूप से भरपूर ऊर्जा उत्तपन्न होती है, अतः यह फटीग सिंड्रोम को कम करने में लाभदायक होता है। 


इस विषय पर एक स्टडी की गयी जिसमे लैब में चूहों पर 21 दिन तक शिलाजीत का प्रयोग किया गया। इसके बाद उनमे फटीग सिंड्रोम उत्पन्न किया गया। रिसर्च से सामने आया कि शिलाजीत के उपयोग से C.F.S. के लक्षणों को ठीक करने में सहायता मिलती है।


शिलाजीत के सेवन से भूख न लगना, पेट के कीड़े, गठिया में भी लाभ होता है। इसके अलावा स्प्लीन के आकार में वृद्धि हो जाने पर भी लाभ होता है।शिलाजीत के सेवन से लीवर और पित्ताशय(गाल ब्लेडर) में पहले से जमा पित्त और कणों को बाहर निकाल देता है, जिससे गाल स्टोन के होने की संभावना कम हो जाती है, और लिवर भी डेटॉक्सीफाई हो जाता है।

शिलाजीत के सेवन से यूरीनरी ट्रैक्ट, और यूरीनरी ब्लैडर के इन्फ्लेमेशन भी दूर होने लगते हैं।

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